Saturday, 16 February 2013

मधुर वाणी पर सोच समझकर विचार करना चाहिए और हमेशा सोच समज कर ही बोलना चाहीये हमेशा प्रिय बोलने वाले देव होते हैं और कू्र भाषी बोलने वाले पशु होते हैं। आज सुबह सन्सकार चेनल देख रहा तब ये भी ऎसा सुना त्रिवेणी के पावन तट एवं महाकुंभ के अवसर पर शांतिदूत देवकीनंदन ने अपनी मधुर वाणी में उपस्थित जनसमूह के संबोधित करते हुए कहा कि मानव के जीवन में मधुर वाणी सत्संग एवं भजन करने से ही शांति आ सकती है.......... ललीत जोशी......

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